Chaiti Chhath Puja 2018 || चैती छठ, चैती छठ 2018 पूजा, चैती छठ कब है 2018, छठ पूजा मार्च 2018, चैती छठ पूजा कैसे करें, चैती छठ 2018 डेट

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Chaiti Chhath or Chota Chhath is celebrated in the summer season (March-April), on Chaitra Shashthi, a few days after Holi festival. As the festival is celebrated in the month of “Chaitra” as per Hindu calendar, it is called Chaiti/ Chaitra Chhath.

छठ पर्व की और महत्वपूर्ण जानकारियां :

  • पहला दिन नहाय-खाय
  • लोहंडा या खरना
  • पहला अर्घ्य
  • सुबह का अर्घ्य

छठ पूजा मार्च 2018, चैत्र मास, चैती छठ का विवरण इस प्रकार है :- चैती छठ 2018
2018 में चैती छठ की डेट –

  • 20 मार्च 2018 : नहाय खाय छठ 
  • 21 मार्च 2018 : खरणा छठ 
  • 22 मार्च 2018 : चैती छठ * मुख्य दिन पहला अर्घ्य (अरग) 
  • 23 मार्च 2018 : पारण छठ पूजा


हिन्दू कैलेंडर के अनुसार नए साल के पहले महीने यानी चैत्र की षष्ठी तिथि को मनाए जाने के कारण इस पर्व को चैती छठ कहा जाता है। इंग्लिश कैलेंडर के हिसाब से यह मार्च-अप्रैल के महीने में आती है। होली के कुछ दिनों बाद मनाये जाने वाले इस पर्व को पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड) और उत्तर भारत में कुछ हिस्सों में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

कर्तिक छठ की ही तरह चैती छठ भी 4 दिनों का पर्व है जिसमे – नहाय खाय, खरणा, संध्या घाट और भोरवा घाट सम्मिलित है।

पहला दिन नहाय-खाय
छठ पर्व का पहला दिन जो होता है उसे नहाय खाय कहा जाता है, उस दिन घर की साफ़ सफाई करके छठ व्रती स्नान कर पवित्र तरीके से शाकाहारी भोजन ग्रहण कर छठ व्रत की शुरुवात करते है। उस दिन को कद्दू-भात भी कहा जाता है। उस दिन व्रत के दौरान चावल, चने की दाल और कद्दू (घिया, लौकी) की सब्जी को बड़े नियम-धर्म से बनाकर प्रसाद रूप में खाया जाता है।

लोहंडा या खरना
छठ पूजा के दुसरे दिन को खरना या लोहंडा कहा जाता है। छठ व्रती दिन भर उपवास करने के बाद शाम को भोजन करते है। जिसे खरना कहा जाता है। खरना का प्रसाद चावल को गन्ने के रस में बनाकर या चावल को दूध में बनाकर और चावल का पिठ्ठा और चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। शाम को पूजा पाठ के उपरांत पहले छठ व्रती खाते है उसके बाद घर के अन्य सदस्यों को प्रसाद के रूप में वही भोजन मिलता है।

पहला अर्घ्य
तीसरे दिन दिनभर चहल पहल का माहौल रहता है। व्रतधारी दिन भर डलिया और सूप में नानाप्रकार के फल, ठेकुआ, लडुआ (चावल का लड्डू), चीनी का सांचा इत्यादि को लेकर शाम को बहता हुआ पानी (तालाब, नहर, नदी, इत्यादि) पर जाकर पानी में खड़े होकर सूर्य की पूजा करते हुए परिवार के सभी सदस्य अर्घ्य देते है। और फिर शाम को वापस घर आते है। रात में छठ माता के गीत वगेरह गाया जाता है।



सुबह का अर्घ्य
चौथे दिन छठ व्रती को सूर्य उगने के पहले ही फिर से उसी तालाब, नहर, नदी पर जाना होता है जहां पर तीसरे दिन गये थे। अब उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए भगवान् सूर्य से प्रार्थना करते है। परिवार के सभी सदस्य भी व्रती के साथ अर्घ्य देते है और फिर वापस अपने घर को आते है।

छठ व्रती चार दिनों का कठिन व्रत करके चौथे दिन पारण करते है। और एक दुसरे के घर में प्रसाद का आदान प्रदान होता है।

अगर कोई त्रुटी इस आर्टिकल के लिखते वक्त रह गई हो तो क्षमा प्रार्थी है। यहाँ पर सिर्फ छठ पूजा की जानकारी मात्र देने का उद्देश्य है।

Just like the Kartik Chhath, this festival is also celebrated for four days including- Naha Khay, Kharna, Sanjhiya/ Sandhya Ghat and Bhorwa Ghat or Paran Chhath.

The very first day of Chhath Puja is called Nahay Khay that literally means bath and eat. On this day, vratti or devotees take a holy dip or bath in the river Ganges and follow the path of self-resistance from the worldly things. On this day the women folks who observe the fast, take only one mean all through the day, mainly kaddu bhat with dal (only chana or mung dal). The meal is prepared only in soil or bronze utensils.

The second day of the festival is called Kharna, Lohanda or Barauna. On this day female folks observe a fast for the day. In the evening, they prepare special Prasad kheer (cooked rice in jaggery or milk), puris and fruits. This Prasad is offered to the Chhathi Maiya and later the devotee breaks her fast by eating this Prasad. Later on, the Prasad is distributed among family and friends.

The third day of Chhath Puja is called Sandhya Ghat (Evening Offering). The whole day goes in preparing delicacies and Prasad. The Vratti and family members wear new cloths and gather either at the banks of a river, pool or pond. They site there for one to two hours and worship Sun God, sing Chhath songs. Just after the sun sets, they offer evening arghya or Sandhya Arghya to perform the rituals of the day.

On the last day (Paran Day) or Bhorwa Ghat (Morning Arghya) vratti again get ready and go to the banks of the river, pond and pool. The offerings are offered to the rising Sun. the Festival of Chhath ends this day. Vrattis after returning to home, break their fast by taking ginger and water followed by delicious food.

ये त्यौहार चार दिन का होता है। इस पर्व में चारो दिन का अपना-अपना महत्व होता है। वर्ष 2018 में चैती छठ 20 मार्च से प्रारंभ होकर 23 मार्च तक होगी। छठ पूजा प्रारंभ होने के पहले दिन को नहाय खाय कहते है। इस दिन घर की पूरी सफाई करके घर को शुद्ध किया जाता है। उसके बाद छठव्रती स्नान आदि करके शुद्ध भोजन करते है। दूसरे दिन खरना का कार्यक्रम होता है। इस दिन मुँह में एक तिनका डाले बिना प्रसाद तैयार किया जाता है। और शाम को भोजन किया जाता है। इस दौरान पुरे घर की स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखा जाता है।

व्रत रखने वाले को पूरी शुद्धता का ध्यान रखा चाहिए। इसके अतिरिक्त उसे परिवार से अलग कमरे में एक चद्दर या कंबल पर जमीन पर ही सोना होता है। तीसरा यानि षष्ठी तिथि का दिन चैती छठ पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इसी दिन सभी रस्मो को किया जाता है और सूर्य देव का आशीर्वाद लिया जाता है। तीसरे दिन संध्या अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन छठ प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद में ठेकुआ, चावल के लडडू आदि बनाते है। और विधि अनुसार डूबता हुए सूर्य को अर्घ्य देते है। व्रत के अंतिम और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा सम्पूर्ण करने के पश्चात कच्चे दूध का शर्बत पीकर और थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत सम्पूर्ण किया जाता है।

Chhat Puja 2018 Date & Time in India, छठ पूजा 2018 तारीख और समय

There are many names of this festivals they are.. Chhat, Chhati, Chhat Parv, Chhat Puja, Data Chhat, Dala Puja, Surya Sasthi हिंदी में इस त्योहार को कई नामों से जाना जाता है, जैसे.... छठ, छठी, छठ पर्व, छठ पुजा, डाला छठ, डाला पुजा, सूर्य षष्ठी

About Chhat Puja : Chhath is an ancient Hindu Vedic festival dedicated to the Hindu Sun God, Surya and Chhathi Maiya (ancient Vedic Goddess ; Usha - wife of Sun God ).The Chhath Puja is performed in order to thank Surya for sustaining life on earth and to request the granting of certain wishes. This festival is observed by Nepalese people and Indian people along with their diaspora.
The Sun, considered as the god of energy and of the life-force, is worshiped during the Chhath festival to promote well-being, prosperity and progress. In Hinduism, Sun worship is believed to help cure a variety of diseases, including leprosy, and helps ensure the longevity and prosperity of family members, friends, and elders.

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